Tuesday, 31 January 2023

आख़िरी पन्ना

 आख़िरी पन्ना

स्टाक मार्केट में घुसने से पहले किसी को ये अंदाज़ा नहीं होता कि यहाँ पैसा कमाना इतना कठिन है । शुरु में अकाउंट खोलते हुए रिलेशनशिप मैनेजर की मानें तो उनके एडवाइज़री सर्विसेज़ ही काफ़ी हैं पैसा बनाने को ! आदमी को लगता है कि बस यहाँ अकाउंट खोला और एडीशनल इनकम चालू ! फिर दुनिया भर के अख़बार और टीवी चैनल क्या यूँ ही पूरा दिन टें- टें करते रहते हैं?
आँखों के सितारे टूटने में साल भर तो लगता ही है और नौजवान ट्रेडर फिर भी घाटे को पीछे छोड़, ज़िंदगी की होड़ और दौड़ में आगे व्यस्त हो जाता है, पर अधेड़ावस्था की ओर जा रहे व्यक्ति जो इसे रिटायरमेंट के बाद की व्यवस्था के रूप में देख रहे होते हैं, वे इसके जाल से नहीं निकल पाते और अलग-अलग टीवी चैनल तथा एडवाइज़री सर्विसेज़ से उदासीन हो कर ट्रेनर्स और मेन्टर्स की ओर रूख करते हैं!
ज़्यादातर ट्रेनर्स अपने आप को एक्सपोज़ करने से डरते हैं और उनका यह डर उनके इन्टरैक्टिव स्टाइल से झलक ही जाता है!
और इनट्रोडकट्री मीट- अप्स में अगर कोई मार्केट का अनुभवी व्यक्ति शामिल हो जाए तो ये ट्रेनर्स जल्दी ही असहज हो जाते हैं ।
मैं अक्सर इन मीट-अप्स में जाता हूँ, शुरू में मैं अपना प्वाइंट पूछते हुए काफ़ी अग्रेसिव हो जाता था क्यूँकि किसी भी ट्रेनर का जो “नॉन- फेलिंग “ स्टैटजी सुझाने का एटिट्यूट होता है, वो मुझसे बर्दाश्त नहीं होता!
इस बाज़ार में ऐसी कोई स्ट्रेटेजी नहीं है जो हमेशा सटीक बैठती हो पर अपनी स्ट्रेटेजी की कमियाँ बताने का साहस कोई ट्रेनर नहीं कर पाता — हाँ कुछ लोग रिस्क मैनेजमेंट की ज़िक्र ज़रूर करते हैं पर अपनी स्ट्रेटेजी के रिस्क की बात पूछने पर बहुत अॉफेन्ड हो जाते हैं क्यूँकि ऐसा करने से उनका सेल्स एजेन्डा प्रभावित होता है!
ऐसी ही एक मीट ( वर्कशॉप कह लीजिए) , की घटना का ज़िक्र यहाँ कर रहा हूँ!
अधेड़ उम्र के यह दारजी मीटिंग के बीच में अधीर हो उठे और उचक कर बोले कि “ कोई ऐसा तरीक़ा बताइये जिसमें हर महीने एक निश्चित राशि प्राप्त हो सके ! “
उनकी उद्वलित अधीरता को पहचानते हुए मैं ने कहा “ भाई साहब, अभी तो किताब आधी ही हुई है और आप सीधा आख़िरी पन्ना पढ़ने को बेचैन हो उठे ?!”
उस वक़्त तो ये भाई सा’ब बैठ गये पर मैंने देखा कि वे धीरे-धीरे उचाट हो गए और ऊँघने लगे , जैसे कह रहे हों कि “ भाई बहुत मीटिंगों में हो लिया, बस ये आख़िरी पन्ना ही नहीं मिला!! “
अच्छा हो अगर सभी पार्टिसिपेन्ट्स को यह जानकारी रहे कि मीट-अप्स एक मेल- जोल का ज़रिया है—- बस !
और ट्रेनर्स वर्क-शाप्स से आपको कुछ डॉट्स हासिल हो जाते हैं पर इन डॉट्स को जोड़कर पूरी पिक्चर आपको ख़ुद ही बनानी होगी!
यानि आख़िरी पन्ना आपको ख़ुद ही लिखना होगा— इसकी तलाश मे भटकना छोड़ दीजिए!!